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भगवान गणेश भी राजा थे, ये बात आपको शायद न पता हो लेकिन ये पूरी तरह से सच है। जी हाँ, आपको बता दें कि भगवान गणेश को भी राजा की पदवी मिली थी, लेकिन इस बात को बहुत ही कम लोग जानते हैं। ऐसा नहीं है कि वह कैलाश या उसके किसी हिस्से में राजा बना दिये गये थे, बल्कि भगवान गणेश तो पाताल लोक के राजा थे। अब आप सोच रहे होंगे कि पाताल के राजा तो नागराज वासुकि हैं, तो फिर भगवान गणेश वहाँ के राजा कैसे हुये। तो ख़ैर चलिए आज आपको हम इसकी पूरी कहानी बताते हैं।
जी हाँ, मालूम हो कि एक बार भगवान गणेश ऋषि पाराशर के आश्रम में खेल रहे थे तभी वहाँ कुछ नाग कन्याएँ आ गयीं। ये नाग कन्याएँ उनसे आग्रह करके गणेश जी को अपने लोक पातालपुरी लेकर जाने लगीं। भगवान गणेश भी क्या करते वह उनके आग्रह को वह भी कन्याओं के, ठुकरा न सके और चुपचाप उनके साथ उनके लोक पातालपुरी चले गये। मालूम हो कि पाताल लोक में ही नागलोक है।
नाग लोक पहुँचने पर नाग-कन्याओं ने उनका हर तरह से सत्कार किया। तभी नागराज वासुकि ने गणेश को देखा और उपहास के भाव से वे गणेश से बात करने लगे, उनके रूप का वर्णन करने लगे। गणेश को क्रोध आ गया। उन्होंने वासुकि के फन पर पैर रख दिया और वासुकि को सबक सिखाने के लिए उनके मुकुट को भी स्वयं पहन लिया।
वासुकि की दुर्दशा का समाचार सुन उनके बड़े भाई शेषनाग आ गए। उन्होंने गर्जना की कि किसने मेरे भाई के साथ इस तरह का व्यवहार किया है। जब भगवान गणेश सामने आए तो शेषनाग ने उन्हें पहचान कर उनका अभिवादन किया और उनका नागलोक यानी पाताल के राजा के रूप में मनोनयन कर दिया। तब से भगवान गणेश को पाताल का राजा माना जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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