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शिक्षक दिवस आज पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह भारत के पहले उपराष्ट्रपति और पहले दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के दिन हर साल 5 सितम्बर को मनाया जाता है। आपको बता दें कि डॉक्टर राधाकृष्णन समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।
ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में दिये अपने भाषण में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि “मानव को एक होना चाहिए। मानव इतिहास का संपूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है। जब देशों की नीतियों का आधार पूरे विश्व में शांति की स्थापना का प्रयत्न हो।” दिलचस्प है कि डॉ. राधाकृष्णन अपनी बुद्धि से पूर्ण व्याख्याओं, आनंददायक अभिव्यक्ति और हल्की गुदगुदाने वाली कहानियों से छात्रों को मंत्रमुग्ध कर देते थे।
आपको बता दें कि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के चेन्नई से लगभग 64 किमी. की दूरी पर तिरूतनी ग्राम में 5 सितंबर, 1888 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सदियों से इनका जन्म स्थान एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में विख्यात रहा है।
हालाँकि आपको बता दें कि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पुरखे पहले 'सर्वपल्ली' नामक ग्राम में रहते थे और उसके बाद 18वीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने तिरूतनी ग्राम की ओर प्रस्थान किया और यहाँ आकर बस गये थे। चूँकि लेकिन इनके पुरखे चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के ग्राम का बोध भी सदैव रहना चाहिए। इसी कारण इनके परिजन अपने नाम के पूर्व 'सर्वपल्ली' धारण करने लगे थे।
Author: Amit Rajpoot
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