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मुहर्रम को लेकर सबसे पहले बता दें कि यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम के तौर पर मनाया जाता है। इसे इस्लामी महीना कहा जाता है, क्योकि इसी के साथ इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है। 10वें मुहर्रम को इस्लामिक लोग हजरत इमाम हुसैन को याद करते हुए मातम मनाते हैं। हालांकि आज भी हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो शायद मुहर्रम और इस दौरान मनाए जाने वाले मातम से अंजाम होंगे, ऐसे में आज हम आपको इसी से जुड़ी ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जिनके बारे में शायद ही किसी को कुछ पता होगा।
1. इस्लाम के प्रवर्तक पैगंबर मोहम्मद साहब के छोटे नवासे को इराक में यजीद नाम के एक जालिम बादशाह अपने खेमे में शामिल करना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह बात बिल्कुल मंजूर नहीं थी। इसके बाद उन्होंने यजीद के विरुद्ध में जंग का ऐलान कर दिया। लेकिन इमाम हुसैन को कर्बला में उनके परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया। उन्हीं की याद में मुहर्रम का मातम मनाया जाता है।
2. इमाम यजीद से लड़ाई के लिए मात्र 72 लोगों को लेकर पहुंचे थे। उन सभी ने साथ मिलकर 8,000 सैनिकों का सामना किया था।
3. यजीद ने मुहर्रम के महीने में धोखे से इमाम हुसैन को मौत के घाट उतार दिया। यह लड़ाई मुहर्रम के चांद की 2 से 6 तारीख तक चली। उसी दिन से इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत में इस दिन को मुहर्रम के रूप में मनाया जाता है।
4. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद ने इस महीने को अल्लाह का माह बताया है। इसके अलावा इस महीने में रोजा रखने का भी एक अलग ही महत्व होता है।
5. मुहर्रम का मातम सुन्नी और शिया दोनों मुस्लिम मनाते हैं। यह उनका एक तरीका होता है जिससे वे अपेन पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं।
6. मुहर्रम के पूरे 9 दिनों तक मुस्लिम लोग लकड़ी और बांस जैसी चीजों को खूब सजाते हैं। 10वें दिन वह इनके साथ अपने घरों से बाहर निकल पड़ते हैं और मुहर्रम के दिन पूरे नगर में घूमते हैं। इसके बाद इमाम हुसैन की कब्र बनाकर इन्हें दफना दिया जाता है।
7. इस्लामी कैलेंडर एक चंद्र कैलेंडर होता है। इसका इस्तेमाल दुनियाभर के मुस्लिम इस्लामिक पर्वों का सही समय जानने के लिए करते हैं। इसी कैलेंडर के मुताबिक मुहर्रम की पहली तारीख को नया साल हिजरी शुरु होता है।
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