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गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) को वृद्धि दर और फंडिंग दोनों ही मोर्चो पर दवाब का सामना करना पड़ेगा। फिच समूह की कंपनी इंडिया रेटिंग्स ने सोमवार को यह बात कही।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने अपने एनबीएफसी के लिए अपने सेक्टर दृष्टिकोण को संशोधित किया है और नकारात्मक से बदलकर टिकाऊ कर दिया है। हालांकि एजेंसी ने एचएफसी के लिए अपने नकारात्मक दृष्टिकोण को बरकरार रखा है।
इंड-रा को उम्मीद है कि वित्तवर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में चेरी-पिक्ड लोन्स, महत्वपूर्ण परिशोधन, क्रेडिट वृद्धि का न्यूनतम उपयोग और अंतर्निहित खुदरा और वाणिज्यिक कर्जो के लगातार मजबूत प्रदर्शन के आधार पर समग्र उद्योग प्रवृत्तियों की तुलना में संरचित वित्त (एसएफ) रेटेड लेन-देन को टिकाऊ रखा है।
इंड-रॉ ने एनबीएफसी के लिए अपने पूवार्नुमान में वित्त पोषण की चुनौतियों और आर्थिक गतिविधियों में मंदी के कारण वित्तवर्ष 2019-20 के लिए एनबीएफसी के पूर्वानुमान में 15 से 10 फीसदी की कटौती की है, जो वाहनों की बिक्री में गिरावट, ग्रामीण अवसंरचना गतिविधियों में मंदी और लघु और मध्यम उद्यम (एसएमई) चुनौतियों से स्पष्ट है।--आईएएनएस
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