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स्वामी ब्रह्मानंद इस देश के सबसे बड़ेे गौ सेवक थे। ये बुंदेलखण्ड में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ज़िले के ग्राम बरहरा के रहने वाले थए और आजीवन सन्यासी थे। ग़ौरतलब है कि इन्होंने महज 23 वर्ष की उम्र में ही सन्यास ले लिया था। 13 सितम्बर, 1984 को स्वामी जी का देहावसान हो गया था और आज इनकी 35वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। आपको बता दें कि देश का सबसे बड़ा गौ-रक्षा आंदोलन वर्ष 1966 में स्वामी ब्रह्मानंद के नेतृत्व में हुआ था। आज़ादी के बाद स्वामी जी गौ-हत्या को लेकर चिंतित रहने वालों में सबसे आगे थे। साल 1966 में हुये अब तक के सबसे बड़े गौ-हत्या निषेध आंदोलन के ये जनक और नेता थे, जिसमें प्रयाग से दिल्ली के लिए इन्होंने पैदल ही प्रस्थान कर दिया था, जिसमें इनके साथ कुछ और भी साधु-महात्मा थे। स्वामीजी के नेतृत्व में गौ-रक्षा आंदोलन के लिए निकले ये 10-12 लाख लोगों के जत्थे ने सन् 1966 की राम नवमी को दिल्ली में सत्याग्रह किया।
इस आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। वास्तव में गौ-वंश के प्रति स्वामीजी के समर्पण का अंदाज़ा आप उनकी इस बात से ही लगा सकते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि “गौ-वंश की रक्षा के लिए मैं सब प्रकार का त्याग करने को तैयार हूँ। यहाँ तक कि मैं अपने प्राणों की आहूति भी दे दूँगा।”
इस आंदोलन के बाद स्वामी जी चौथी लोकसभा में जनसंघ पार्टी के टिकट पर और पाँचवी लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर हमीरपुर से लोकसभा के लिए चुने गये। इस प्रकार ये सन् 1967 से 1977 तक सांसद के सदस्य रहे। स्वामी जी का सांसद बनना अपने आप में एक विशेष घटना थी, क्योंकि यह गेरुवा वस्त्र धारण करने वाले देश के पहले भगवाधारी सांसद थे।
Author: Amit Rajpoot
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