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बैडमिंटन के गुरु द्रोणाचार्य पुलेला गोपीचंद से तो आप परिचित ही होंगे। जी हाँ, वही जो बैडमिंटन की सनसनी साइना नेहवाल और आजकल दुनिया में बैडमिंटन की सबसे बड़ी पहचान बन चुकीं विश्वचैम्पियनशिप विजेता पीवी सिन्धु के गुरू या कोच हैं। आप सोच रहे होंगे कि हम आपको गोपीचंद के बारे में कुछ बताने जा रहे हैं। यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि हम उनकी नहीं बल्कि उनकी एक और हुनरमंद तीसरी शिष्या से परिचिय कराने जा रहे हैं और यह तीसरी शिष्या कोई और नहीं बल्कि वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकीं मानसी जोशी हैं।
आपको बता दें कि स्विटजरलैंड में सिर्फ़ पीवी सिन्धु को नहीं बल्कि मानसी जोशी को भी मेडल मिला था। मानसी जोशी महाराष्ट्र की रहने वाली हैं, जो पीवी सिन्धु से विशिष्ट हैं और कई मायनों में दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल हैं, जिनसे सभी को प्रेरणा मिलती है। मानसी की ख़ास बात यह है कि मानसी कृत्रिम पांव के सहारे खेलती है तथा अब तक कई बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुकी। वह 2015 से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है और पदक भी जीत चुकी हैं।
सड़क दुर्घटना में एक पांव गंवाने के बाद भी 29 वर्षीय मानसी जोशी के हौसले पस्त नहीं हुए और उन्होंने जीवन में कठिन हालातों के बावजूद अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ा। छोटी सी उम में मानसी जोशी की रूचि बैडमिंटन में हुई। ये बात ग़ौर करने लायक है कि मानसी के पिता मुंबई के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में काम करते थे और यहीं मानसी ने इस खेल की बारीकियां सीखी। आज वह विश्व चैम्पियन हैं और लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
Author: Amit Rajpoot
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