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‘जल है तो कल है’ ये बात हमने बहुत बार बहुत लोगों के मुँह से बहुत सारे तरीक़ों से सुनी होगी। लेकिन इस बात को हमने शायद कम ही सुना होगा कि कल से इस जल हमें आज ही सुरक्षित रखने के इंतज़ाम करने होंगे और आज ही हमें इनके स्वास्थ्य का ख़्याल रखना होगा। जी हाँ, जहाँ जल संरक्षण के मामले में लगभग सभ लोग बेसुध होकर हैं। युवा तो इससे कतई दूर हैं। हालाँकि चंद मुट्ठीभर लोग ऐसे भी हैं, जो जल संरक्षण को लेकर बहुत ही संजीदा भी हैं। इन्हें कुछ संजीदे लोगों में ही एक हैं रामवीर तंवर।
रामवीर तंवर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के गाँव डाढा-डाबरा के रहने वाले हैं। दिलचस्प है कि इन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। पानी के बचाव को लेकर रामवीर अपने बचपन से ही संजीदा रहते थे। तालाबों के साथ उनका अपने लड़कपन से ही एक अच्छा रिश्ता रहा है।
यही कारण था कि जब उन्हें इंजीनियर के तौर पर बढ़िया नौकरी भी मिल गई, तब भी उनके मन में गांव के लोगों के लिए कुछ करने का विचार भरा रहा। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर तालाबों को संरक्षित करने का काम शुरु कर दिया, जिससे पानी को संरक्षित किया जा सके। रामवीर अब तक 10 तालाबों को नया जीवन दे चुके हैं।
आपको बता दें कि जल सरंक्षण जागरूकता पैदा करने के लिए रामवीर जल-चौपाल नाम से जनसभाओं का आयोजन करते हैं। उनके प्रयासों को देखते हुए प्रशासन भी समय समय पर उनको सहयोग प्रदान करता है।
ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य है तालाबों को सरल और लागत प्रभावी तरीकों से साफ करना और फिर स्थानीय किसानों को मछली पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
Author: Amit Rajpoot
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