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दिमाग़ की जैविक गतिविधियों के अध्ययन की शाखा मनोजैविकी के अनुसार दिमाग़ हमारे वजन का केवल दो फीसदी हिस्सा है लेकिन यह हमारी ऊर्जा का बीस फीसदी भाग खपत करता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, शारीरिक और मानसिक काम साथ-साथ करने से व्यक्ति अधिक थकता है, लेकिन केवल मानसिक कार्य करते रहने से भी व्यक्ति को थकान होती है।
जी हाँ, आपको बता दें कि शारीरिक काम की तरह मानसिक काम करने से भी थकान होती है। यह भी देखा गया है कि लगातार दिमाग़ी काम करते हुए एक वक़्त के बाद अक्सर चीज़ें भूलने लगती है और हमारी याददाश्त भी प्रभावित हो जाती है। ऐसे में एक स्थिति ऐसी आती है जब हमारे सारे काम निपटाते हुए हमारा दिमाग़ थक जाता है और हमारे दिमाग़ के थकते ही हम भी थक जाते हैं।
इससे निपटने के लिए अपनी दिनचर्या से थोड़ा सा वक़्त निकालें और हरियाली व प्रकृति के पास बैठें और रहने की कोशिश करें। दिलचस्प है कि केवल बीस मिनट का व्यायाम हमारे दिमाग़ का प्रदर्शन करने और दिमाग़ में रक्त का प्रवाह बढ़ा देता है। इससे हमारे मूड और रचनात्मकता में सुधार आता है। इसलिए अपने दिमाग़ को चुस्त औप दुरुस्त बनाए रखने के लिए थोड़ा सा समय रोज़ निकालें ताकि वह हमेशा फुर्तीला बना रहे।
Author: Amit Rajpoot
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