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खेचरी मुद्रा का अर्त है- मुँह बंद रखते हुए जीभ को उलटकर तालुकाद्वार तक ले जाना। योग की मान्यता के अनुसार इसी द्वार पर अमृत रस का अनुभव होता है। योग की मान्यता के अनुसार खेचरी मुद्रा से आप न सिर्फ़ अपने शरीर बल्कि मन को भी नियंत्रित करने के क्रम में आगे बढ़ते हो। जी हाँ, आपको बता दें कि योग की खेचरी मुद्रा दीर्घायु कारक है। दिलचस्प है कि खेचरी मुद्रा के परिणाम इतने कारगर होते हैं कि इससे आप अपनी भूख और प्यास तक को नियंत्रित कर सकते हैं।
आपको बता दें कि खेचरी मुद्रा के अभ्यास से आप समाधिस्थ होने की योग्यता को स्वयं में विकसित कर पाते हैं। इतना ही नहीं. आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि इसके अलावा खेचरी मुद्रा के अभ्यास से चंद्र, सूर्य और सुषुम्ना नाड़ियाँ ख़ुल जाती हैं, जिससे कि आप अपने जीवन को भी नियंत्रित कर सकते हैं। इस प्रकार, खेचरी मुद्रा के अभ्यास से सम्पूर्ण स्वास्थ्य तो प्राप्त होता ही है, इससे समाधिस्थ होना भी आसान हो जाता है।
खेचरी मुद्रा के अभ्यास से आपको ये बात ज़रूर ध्यान में रखनी चीहिए कि इसके अभ्यास में आपको शुरू में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, क्योंकि सामान्य तरीक़े से हमारी जीभ तालुकाद्वार तक नहीं पहुँच पाती है। लेकिन लम्बे अभ्यास से धीरे-धीरे इसे करना संभव हो जाता है। यह बेहद धीमी रफ़्तार से की जाने वाली योग क्रिया है। इसलिए इसके अभ्यास के लिए कुशल योगाचार्य के मार्गदर्शन की आवश्कता है।
Author: Amit Rajpoot
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