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आजकल एक बात आपने ज़रूर ग़ौर की होगी कि चाहे बच्चे हों, किशोर हों या फिर नौजवान या बूढञे ही क्यों न हों, इन सभी लोगों की दिनचर्या लगभग एक जैसी हो गयी है। जबकि वास्तव में यह बेहद ख़तरनाक होता है। आपको याद भी होगा कि बच्चों के सोने और जागने का क्रम अलग होता है, किशोरों के सोने और जानके का क्रम अलग होता है और उनकी दिनचर्या भी एकदम जुदा होती है। लेकिन इन दिनों आप देखते होंगे कि सब देर रात तक जागने के आदी हो रहे हैं।
आपको बता दें कि देर रात तक जागने के मामले में कमसिन लड़कियाँ यानी कि आज के दौर की किशोरवय या टीन एजर लड़कियाँ भी बिल्कुल पीछे नहीं रही हैं। वह भी देर रात तक गैजेट्स के साथ या बिना गैजेट्स के साथ देर रात तक जागती मिलती हैं। आपको बता दें कि इससे उनको स्वास्थ्य का ख़तरा होता है, जिससे उनमें मोटापा बढ़ता है।
ग़ौरतलब है कि ऑकलैंड कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने 11 से 16 वर्ष की लड़कियों को लेकर यह रिपोर्ट ऑकलैंड कैलिफोर्निया के बाल-रोग जर्नल ‘जामा’ में प्रकाशित की है। उनका दावा है कि लड़कों के ऐसा करने पर उनके मोटापे की संभावना कम होती है। ऐसे में ये बात ग़ौर करने लायक है कि नींद की कमी से लड़कियों में फैट्स को पचाने के तंत्र पर गहरा असर पड़ता है।
Author: Amit Rajpoot
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