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पितृपक्ष का पखवारा चल रहा है। सभी महीनों में ख़ास माने जाने वाले अश्विन के इस महीने में लोग अपने पितरों का तर्पण करते हैं और उनका श्राद्ध करते हैं। आपको बता दें कि शास्त्रों का ऐसा मत है कि श्राद्ध तीन पीढ़ियों तक करना चाहिए और इसी का विधान है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि यदि पितरों के निधन की तिथि ही सही ढंग से मालूम न हो तो ऐसे में जातक को यह दिक्कत आती है कि वह पितृपक्ष की किस तिथि को यानी कि किस दिन अपने पितरों का श्राद्ध करे और उनका तर्पण करे।
इसके लिए शास्त्रों में बहुत ही उत्तम विचार दिये गये हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि पितरों के निधन की तिथि मालूम न होने पर भी लोग अश्विन की अमावस्या को श्राद्ध कर सकते हैं, ऐसा शास्त्रों में विधान है। वैसे भी सभी पितरों की तिथि याद नहीं रखी जा सकती है। इस स्थिति में लोग अश्विन के महीने अमावस्या के दिन ही अपने पितरों का तर्ण करना सबसे श्रेष्ठ समजा जाता है। मालूम हो कि इस अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष भी समाप्त हो जाता है और ऐसे में अंत भला तो सब भला।
आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या यानी कि अश्विन की अमावस्या को पीपल के वृक्ष की सेवा और पूजा करने से पितर प्रसन्न रहते हैं। इस दिन पितरों को भोजन कराने और उनके श्राद्ध का समस दोपहर का होता है। इस दिन घर के सभी सदस्य एक सात भोजन करें और पितरों की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करें।
Author: Amit Rajpoot
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