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भारत को पहले सोने की चिड़िया कहा जाता था, वजह थी यहां राजा-महाराजा जिनके पास बेशुमार धन-दौलत हुआ करती थी। लेकिन कहते हैं न जिस तरह एक हाथ की सभी उंगलियां एक समान नहीं होती, ठीक उस तरह व्यवहारिक तौर पर कोई एक जैसा नहीं हो सकता। इसी तरह हमारे इतिहास में कई सुशासन वाले राजा-महाराजा रहे हैं, ठीक उसी तरह हमारे ही इतिहास में कई ऐसे भी राजा-महाराजाओं ने भी राज किये है जिनका शासन कुशासन से कम नहीं है। उन्हीं में से एक है पटियाला के 7वें महाराजा ‘भूपेंद्र सिंह’। इनके बारे में इंटरनेट सर्च किया तो पता चला कई इतिहासकार इन्हें भारत के अय्याश राजाओं में से एक माना करते थे।
इन्हें अपने राज में शासन और जनता से कुछ ज्यादा लेना देना नहीं था... ये केवल अपनी धन-दौलत अपने शौक पूरे में खर्च करते थे।
भूपेंद्र सिंह को 3 चीज़ों का बड़ा शौक था... एक शिकार, दूसरा पोलो और तीसरा सेक्स।इतिहासकारों की मानें, तो महाराजा भूपेंद्र की 10 अधिकृत रानियों समेत 365 रानियां थी, जिनके वह इकलौते पति थे।
अब 365 रानियों में से किस रानी के साथ रात गुजारनी है, इसका फैसला करने के लिए भी राजा ने एक बेहद ही दिलचस्प हथकंडा अपना रखा था। दरअसल, राजा के महल में उनकी रानियों के बराबर 365 लालटेन लगी थी, इन सभी लालटेन पर उनकी सभी रानियों का नाम भी लिखा था। कहा जाता है कि ये लालटेन रातभर जलती थी, वहीं सुबह जो भी लालटने सबसे पहले बुझती थी, उस नाम की रानी के साथ वह आने वाली रात गुजारा करते थे।
सेक्स के अलावा उन्हें शिकार का भी बेहद शौक था।
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