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नवरात्रि का आगमन हो रहा है। लोग नवरात्रि में व्रत रखने की योजना बी बना रहे होंगे, लेकिन हम आपको बता दें कि व्रत तो नवरात्रि में रखिए ही रखिए, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि यह मजह व्रत रख लेने भर का पर्व नहीं होता है, बल्कि यह नवरात्रि तो अपनी अंतर्चेतना के जागरण का महापर्व है। जी हाँ, आपको बता दे नवरात्रि में केवल व्रत मात्र का विदान नहीं है, बल्कि यह तो एक अनुष्ठान है। यह ख़ुद से साक्षात्कार करने का और शक्ति स्वरूपों को जानने व समझने का सुअवसर है।
आपको बता दें कि नवरात्रि में हम सभी को कुछ आचरण और व्यवहार अवश्य फॉलो करने चाहिए यानी कि कुछ ख़ास तरह के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। मसलन पहला कि इन नौ दिनों तक हमे ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। दूसरा नियम है उपवास।
जिनके लिए सम्भव हो वे नौ दिनों तक फल व दूध पर ही रहें या फिर एक समय अन्नाहार और एक समय फलाहार भी कर सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आप केवल और केवल दूध पर ही रहें। इनमें से जो भी उपवास आप कर सकते हैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार कर सकते हैं।
ग़ौरतलब है कि नवरात्रि में उपवास और ब्रह्मचर्य के पालन के अलावा तीन नियम और भी बताए गये हैं। ये हैं- कोमल शैया का त्याग, अपनी शारीरिक सेवाएँ अपने हाथों करना और हिंसक साधनों जैसे चमड़े के जूते, रेशम के कपड़े, कस्तूरी, मांस, मछली, अंडा और मुर्गे के मांस आदि के सेवन से इन नौ दिनों तक बचना चाहिए यानी कि इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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