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शारदीय नवरात्रों की शुरुआत हो चुकी है, कल 29 सितंबर 2019 को पहला नवरात्रि व्रत रखा गया था। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है, इस दिन मां ‘ब्रह्मचारिणी’ की पूजा अराधना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ होता है ‘साधना’ अथवा ‘तपस्या’ और चारिणी का अर्थ है ‘आचरण करने वाली’। साधक इस दिन अपने मन को मां के चरणों में लगाता है। मां की पूजा अराधना अत्यंत फलदायिनी होती है। अगर इस दिन आप सच्चे मन से मां की अराधना करते हैं, तो आपके मन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और सफलता में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती है। हालांकि, इसके लिए विशेष है मां की नियमोनुसार की जाने वाली पूजा।
इस दिन मां की अराधना शुरु करने से पहले आप ये श्लोक जरूर पढ़ें-
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।
देवी मां की पूजा अराधना के नियम-
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हुए आपको सफेद या फिर पीले कपड़े पहनने चाहिए। सफेद व पीला रंग चित को शांत रखने का काम करते है।
मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित की जाने वाली सभी चीज़ों का रंग भी आपको सफेद रखना चाहिए... जैसे भोग के लिए दूध, दही, मिश्री, सफेद फूल इत्यादि।
इसके अलावा मां को चंदन का टिका लगाना चाहिए।
मां की आरती की ज्वाला में विशेष रूप से कपूर, लौंग और इलायची को घी में डूबोकर डालना चाहिए।
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