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जहां जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने को लेकर हर तरफ विलाप हो रहा है, वहीं केंद्र के इस ऐतिहासिक फैसले के कुछ शांत समर्थक भी हैं, जिनकी आवाज इस शोर में दब गई है।केंद्र सरकार के इस निर्णय का कुछ युवा समर्थन कर रहे हैं, जिनमें से कुछ लोग सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहते हैं। लेकिन मीर जुनैद जैसे लोग भी हैं, जो इस मामले में मुखर हैं।नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर परोक्ष तरीके से हमला करते हुए जुनैद ने आईएएनएस से कहा, "जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने से ऐसे लोगों को फायदा नहीं है, जो राज्य में स्वायत्तता या स्वशासन चाहते हैं।"
एनसी राज्य में जहां स्वायत्तता की मांग कर रहा है, वहीं पीडीपी राज्य में स्वशासन की मांग करती आई है।कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में लंगेट निवासी जुनैद (27) ने कहा, "मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 और 35ए खत्म होने से जम्मू एवं कश्मीर की जनता को राजनीतिक वंशों से आजादी मिली है। समाज के दबे वर्ग को सरकार के इस कदम से लाभ होगा।"यह पूछने पर कि अगर सरकार का कदम सकारात्मक है तो कुछ लोग आक्रोश क्यों दिखा रहे? उन्होंने कहा, "उनकी दुकानें बंद हो गई हैं और इसी लिए वे असंतोष दिखा रहे हैं। अन्यथा, अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर एक विश्वस्तरीय सामाजिक-आर्थिक आंदोलन में बदल जाता।"जुनैद ने स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी से नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे केंद्र सरकार के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किए जाने के मुद्दे पर बहस के दौरान कुछ वादे किए थे।
अपने कुछ मित्रों से दिल्ली मिलने आए जुनैद ने कहा, "गृहमंत्री ने कहा कि यह जम्मू एवं कश्मीर के विकास और भलाई के लिए है। तो अगर वादे पूरे होते हैं तो हमें खुशी होगी। केंद्र ने जिस आधार पर अनुच्छेद 370 और 35 ए खत्म किए हैं, उन्हें पूरा करना होगा। शाह ने घाटी में सामान्य स्थिति होते ही उसे राज्य का दर्जा देने का भी आश्वासन दिया है।"जुनैद ने कहा कि उन्होंने हाल ही में यहां गृह मंत्रालय में सरपंचों के प्रतिनिधिमंडल के साथ शाह से मुलाकात की थी और "उन्होंने यह वादा किया है।"
जम्मू एवं कश्मीर के राजनीतिक तंत्र पर हमला करते हुए जुनैद ने कहा, "अनुच्छेद 370 और 35 ए को खत्म किए जाने से हमें उम्मीद जगी है कि हमारी आवाज सुनी जाएगी। इससे पहले सिर्फ कुछ राजनीतिक दलों के परिवारों को ही राजनीति करने का अवसर मिलता था। लेकिन अब यह खत्म हो गया है। अब सिर्फ क्षमतावान लोग ही प्रगति करेंगे।"उन्होंने कहा, "हम जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के वास्तविक अधिकारों की लड़ाई करेंगे, लेकिन यह भारतीय संविधान के दायरे में रहेगी।"--आईएएनएस
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