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देवी शक्ति ईश्वर की स्त्री प्रकृति का नाम है, जिसके प्रति समस्त शक्तियाँ समर्पित होती हैं। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को को स्त्री प्रकृति के तीन प्रमुख आयामों के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। वे अस्तित्व के तीन मूलभूत गुणों तमस, रजस और सत्व का प्रतीक भी मानी जाती हैं। तमस का अर्थ निष्क्रियता, रजस का अर्थ है क्रिया अथवा जुनून और सत्व का प्रतीक है समर्पण यानी कि एक तरह से सीमाओं को तोड़ना, विलीन हो जाता, पिघलना और समा जाना।
आपको बता दें कि इन तीन खगोलीय वस्तुओं में जिनसे हमारे शरीर की रचना बहुत ही गहराई के साथ जुड़ी है- धरती, सूर्य और चन्द्रमा। इनमें धरती माता को तमस का प्रतीक माना जाता है। सूर्य रजस है और चन्द्रमा सत्व है। जो लोग शक्ति की, अमरता की और ताक़त की इच्छा करते हैं वे लोग स्त्री के तमस रूप की पूजा करते हैं जैसे की धरती माता और काली माता।
इसके अलावा जो लोग धन दौलत की, जुनून की, जीवन की और भौतिक दुनिया के तमाम दूसरे उपहारों की इच्छा करते हैं। वे लोग स्त्री के रजस गुण जैसे कि लक्ष्मी माता आदि की पूजा करते हैं। इनका स्वामी सूर्य है या कहें कि ये सूर्य गुणी हैं।
अंत में, जो लोग ज्ञान की, बोध की, परे जाने की, शरीर की अमरता नहीं, बल्कि नश्वर शरीर की सीमाओं से परे जाने की इच्छा करते हैं, वे स्त्री प्रकृति के उस आयाम की आकांक्षा करते हैं जिसे सत्व कहा जाता है। इसका प्रतीक हैं माता सरस्वती यानी कि चन्द्रमा प्रकृति की देवी।
Author: Amit Rajpoot
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