Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
करवाचौथ व्रत का विधि-विधान तो हर कोई जानता है, दिन-भर विवाहिता स्त्री निर्जल व्रत रहकर पति की लम्बी उम्र की कामना करती है और शाम को चांद और पति का चेहरा देखकर अपना उपवास खोलती है। इस व्रत में कुछ चीज़ों का बड़ा ही महत्व होता है, कल हमने आपको छलनी के महत्व को बताया था। ठीक उसी तरह आज हम आपको करवाचौथ के व्रत में ‘करवे’ के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।
करवाचौथ का व्रत पति के हाथों करवे से पानी पीकर खोला जाता है, ये तो हर कोई जानता है लेकिन इसके पीछे क्या वजह है... इसका महत्व क्या है? शायद ही कोई इस बारे में जानता हो।
आज आपको बताएंगे कि क्यों करवे से पानी पीकर ही करवाचौथ का व्रत खोला जाता है-
करवा चौथ पर करवे का बड़ा ही महत्व होता है। करवा मिट्टी और पानी से बनाया जाता है। मिट्टी जहां पृथ्वी का प्रतीक है, तो वहीं पानी जल का प्रतीक है। वहीं, करवे को बनाकर सुखाने में हवा और धूप का इस्तेमाल किया जाता है... जिसे आकाश और वायु का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद इस करवे को ठोस बनाने के लिए आग में पकाया जाता है, ताकि ये पक्का हो जाये। जिसे अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करवे के अंदर सृष्टि के पांचों तत्व शामिल हो जाते हैं। जोकि इस करवे की अहमियत को और अधिक बढ़ा देते हैं।
कहा जाता है कि चांद के दर्शन करने के बाद पति के हाथ से करवे का पानी पीने से जिसमें पांचो तत्वों की मौजूदगी होती है, शादीशुदा जीवन खुशहाल बना रहता है।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से...
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.