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धनतेरस से ही दिवाली के पांच दिनों का त्योहार शुरू हो जाता है। धनतरेस पर जहां एक ओर बाजारों में एक ही रौनक देखने को मिलती है, वहीं दूसरी ओर घरों में खूब साज-सजावट हो चुकी होती है। कहा जाता है कि इन दिनों में देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में जाकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर धनतेरस का त्योहार क्यों मनाया जाता है? और इसके पीछे की क्या कथा है? तो चलिए इस त्योहार का जश्न मानने से पहले इसकी कहानी के बारे में जान लिया जाए।
शास्त्रों में कहा गया है कि, एक बार भगवान विष्णु धरती का भ्रमण के लिए आ रहे थे, लेकिन तभी माता लक्ष्मी ने उनसे साथ आने का आग्रह किया। इस पर विष्णु जी बोले अगर तुम मेरी बात मानोगी तो साथ आ सकती हो। इस पर देवी लक्ष्मी ने हांमी भरी और प्रभू के साथ पृथ्वीलोक पर पहुंच गईं। कुछ दूर चलने के बाद एक जगह पहुंचकर भगवान विष्णु ने उनसे कहा कि, मैं दक्षिण दिशा की ओर जै रहा हूं, तुम मेरे साथ वहां नहीं आ सकती। इसलिए जब तक मैं वापिस न आ जाऊं तुम मेरा यहीं पर ही इंतजार करो।
हालांकि, विष्णु जी के वहां से जाने के बाद मां लक्ष्मी के मन में इस बात को जानने की जिज्ञासा उठी कि आखिर वह दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है जो मैं वहां नहीं जा सकती, और भगवान खुद चले गए। उनसे रहा नहीं गया और वह भी विष्णु जी के पीछे-पीछे चल पड़ी। थोड़ी दूर जाने पर उन्हें एक सरसो का खेत दिखा, जहां बेहद खूबसूरत सरसों के फूल लगे थे। देवी इन फूलों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गईं और इन्हें तोड़कर अपनी श्रृंगार करने लगी। अब वह और आगे बढ़ी तो उन्हें गन्ने के खेत मिले। वहां से उन्होंने गन्ना तोड़ा और उसका रस चूसने लगीं। लेकिन तभी भगवान विष्णु वहां पहुंच गए।
विष्णु ने दिया देवी लक्ष्मी को श्राप:-
देवी लक्ष्मी को अपना पीछा करते देख विष्णु जी उनसे बहुत नाराज हुए और गुस्से में श्राप दिया। उन्होंने कहा कि, मैंने तुम्हें यहां आने के लिए मना किया था, लेकिन तुमने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया और किसान के खेतों में चोरी करने का गंभीर अपराध कर डाला। विष्णु जी उन्हें दंड देते हुए कहा कि अब तुम्हें 12 सालों तक किसान की सेवा करनी होगी। इतना कहकर भगवान विष्णु वहां से क्षीरसागर चले गए। इसके माता उसी किसान के घर में रहने लगीं। एक दिन मां लक्ष्मी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुन स्नान आदि सबकुछ करने के बाद मेरी बनाई हुई लक्ष्मी पूजन करो और फिर रसोई तैयार करना। इसके बाद जो चाहो वो मांग लो।
किसान पत्नी से बिल्कुल वैसा ही किया। इसके बाद इस किसान के घर का धन-धान्य, सोना-चांदी अनाज और स्वर्ण रत्नों से भर गया। किसान के 12 साल किसी महाराजा की जिंदगी से कम नहीं थे। लेकिन इन 12 सालों में देवी लक्ष्मी भी श्राप से मुक्त हो गईं। इसके और भगवान विष्णु उन्हें लेने के लिए फिर से पृथ्वीलोक पर आ गए। लेकिन किसान ने उन्हें भेजने के लिए साफ इंकार कर दिया। इस पर विष्णु जी बोले, यह चंचला है जो कहीं नहीं रुकती। मेरे श्राप की वजह से इन्हें 12 सालों तक तुम्हारी सेवा करनी पड़ी।
लेकिन किसान अपनी जिद्द पर अड़ गया और कहने लगा कि मैं लक्ष्मी जी को यहां से कहीं नहीं जाने दूंगा। इसके बाद लक्ष्मी जी ने किसान से कहा कि, अगर तुम मुझे रोकना चाहते हो तो, मैं जो कहूं वही करना। कल तेरस है। कल तुम अच्छी तरह अपने घर को लीप-तोपकर सफाई करना, फिर रात में घी का दीया जलाकर मेरी पूजा-अर्चना करना। इसके बाद एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रख देना। मैं तुम्हारे उस कलश में निवास करूंगी। लेकिन पूजा के वक्त मैं तुम्हें दिखूंगी नहीं। ऐसा करने से मैं पूरे साल तुम्हारे घर में रहूं।
इसके बाद देवी लक्ष्मी दीए के प्रकाश के साथ ही हर दिशा में चली गईं। अगला दिन आया तो किसान ने देवी के बताए अनुसार हर काम किया। ऐसा करने से वह उसका घर धन और सुख-संपत्ति से भर गया। तब से आज तक हर साल तेरस पर देवी लक्ष्मी को पूजा जाता है। माना जाता है कि इस दिन वह हमारे बीच ही विराजमान हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसा रही हैं।
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