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आज 8 नवंबर है, जी हां वो ही 8 नवंबर... जिसकी रात को हर भारतीय के घर में खलबली मच गई थी। आज से तीन साल पहले इसी तारीख को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक रात 8 बजे देश के नाम संबोधन करते हुए 500 और 1000 रूपये के नोटों पर बैन लगा दिया था। वजह कई बताई गई... जैसे कालाधन वापिस आएगा.... आतंकवाद पर रोक लगेगी.... भ्रष्टाचार खत्म होगा... इत्यादि। आज से तीन साल बाद अगर इन सभी वजहों को देखा जाये, तो नोटबंदी केवल नए नोटों की लॉन्चिंग का एक भव्य इवेंट का प्रतित होती है। खैर आज इस काली रात को 3 साल पूरे हो गये हैं।
हम में से शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो पीएम मोदी द्वारा की गई इस ‘नोटबंदी’ को अपनी जिंदगी में भूल पाएगा। ये हमारे लिए किसी ऐतिहासिक कदम से कम नहीं था। जब भी भविष्य में नोटबंदी के बारे में हम से पूछा जाएगा तो हम चौड़ में बता पाएंगे कि हां हमारे सामने हुआ था ये सब बवाल।
लेकिन, जरा रूकिये आपकी नॉलेज के लिए बता दें कि पीएम मोदी द्वारा की गई नोटबंदी इकलौती भारत की नोटबंदी नहीं थी। पीएम मोदी से पहले भी भारत में 2 बार नोटबंदी की जा चुकी है।
आइए जानते हैं भारत में कब-कब हुई है नोटबंदी-
भारत में साल 2016 से पहले 2 बार नोटबंदी हुई है... एक बार अंग्रेजों ने साल 1946 में नोटबंदी घोषित की थी... वहीं दूसरी बार साल 1978 में नोटबंदी घोषित की गई थी। जनवरी साल 1946 में अंग्रेजों ने नोटबंदी घोषित करते हुए उस दौरान चलने वाले 1000 और 10000 के नोटों को बंद कर दिया था। उस वक्त 10,000 का नोट पहली बार 1938 में चलाया गया था। हालांकि, साल 1958 में एक बार फिर 1000, 5000 और 10 हजार के नोट को शुरू किया गया था।
इसके बाद 16 जनवरी 1978 में जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने फिर इन सभी नोटों यानी 1000, 5000 और 10 हजार के नोटों पर बैन लगा दिया गया था ताकि कालेधन और जाली नोटों के धंधों पर रोक लगाई जा सके।
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