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पॉप सिंगिग को एक अलग ही पहचान देने वाली भारतीय पॉप सिंगर ऊषा उत्थुप आज अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। पिछले लंबे वक्त से अपनी अलग आवाज से दर्शकों का मनोरंजन करती आ रही हैं। लोग सिर्फ उनके गानों से ही नहीं, बल्कि उनकी पर्सनैविटी ने भी लोगों को बहुत प्रभावित किया है। कांजीवरम साड़ी, माथे पर गोल बड़ी सी बिंदी और बालों में फूल उनकी पहचान बन चुके हैं। वक्त के साथ उनके रूप में काफी बदलाव आया है।
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ऊषा का जन्म देश की आजादी वाले वर्ष, यानी 1947 को मुंबई के एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। वह हमेशा से ही सिंगिग की ओर आकर्षित रहती थीं, लेकिन अपनी आवाज के कारण उन्हें म्यूजिक क्लासेस में अनफिट माना जाता था। हालांकि, उन्होंने कभी हार नहीं मानी और बिना किसी से संगीत का प्रशिक्षण लिए स्टेज पर परफॉर्मेंस में देने लगी। केवल 20 साल की उम्र में उन्होंने साड़ी पहनकर चेन्नई के माउंड रोड पर स्थित एक छोटे से नाइट क्लब जेम्स में गाना गाया।
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इस नाइट क्लब के मालिक को ऊषा की आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने उन्हें एक हफ्ते तक वहीं रुकने के लिए कहा। अपनी इस सफलता के बाद उन्होंने मुंबई और कोलकत्ता के और भी नाइटक्लब को अपनी आवाज से सजाया। लेकिन उनकी लाइफ में बदलाव तब आया जब वह दिल्ली के ओबेरॉय होटल में गाने के लिए पहुंची। एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां उनकी मुलाकात अभिनेता शशि कपूर से हुई। वह ऊषा की आवाज से इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने उन्हें फिल्मों में गाने का मौका दे दिया।
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ऊषा उत्थुप ने इसके बाद 1970 में फिल्म 'बॉम्बे टॉकीज' के लिए अंग्रेजी में एक गाना गाया। फिर उन्हें फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' में आशा भोसले के साथ 'दम मारो दम' गाने का मौका मिला, लेकिन किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि, बाद में उन्होंने इस गाने में अंग्रेजी की कुछ लाइनें गाने गाईं। कुछ समय में ही ऊषा उत्थुप की आवाज इंडस्ट्री में सभी के गानों में पड़ी और लोग झूमने लगे।
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उन्होंने अपनी अनोखी आवाज के दम पर ही बप्पी लहरी और आर डी बर्मन जैसे म्यूजिक कम्पोजर्स को भी खूब प्रभावित किया। 70 और 80 का ऐसा दशक था जब उन्होंने बहुत सी फिल्मों में अपनी आवाज दी और वह हिट भी रहीं। वह अपने लंबे फिल्मी करियर में 17 भारतीय और 8 विदेशी भाषाओं के गीतों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी हैं।
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