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बचपन की यादें ताजा करके सोचों तो जब भी हम स्कूल में कोई बदमाशी करते थे या फिर कुछ गलती करते थे... तो टीचर तुरंत हमें कान पकड़कर ‘उठक-बैठक’ करने की सजा दे देती थी। बचपन में ये करना बड़ा ही शर्मिंदगी भरा लगता था। लेकिन क्या आप जानते हैं बचपन का ये शर्मिंदगी भरा पल हमारे दिमागी विकास के लिए कितना जरूरी और फायदेमंद साबित हुआ करता था। आइए आज जान ही लेते हैं कि आखिर क्यों बचपन में बच्चों को ‘कान पकड़कर उठक-बैठक’ करने की सजा दी जाती थी।
इस बात में कोई दोराय नहीं कि स्कूल के समय में बच्चों को दी जाने वाली सभी सजाएं और सीख उन्हीं के भले के लिए हुआ करती थी। कान पकड़कर उठक-बैठक करना भी हमारे ही भले के लिए था।
इस बात को वैज्ञानिकों ने भी माना है कि उठक-बैठक करने से दिमाग तेज होता है और हमारे शरीर को काफी फायदा पहुंचता है। वैज्ञानिकों के साथ-साथ हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी इसके फायदों का जिक्र है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में भगवान की पूजा अर्चना इस तरह उठक-बैठक करके की जाती है।
ये होता है फायदा-
कान खींचकर उठक-बैठक करने से हमारा दिमाग तुरंत सक्रिय होता है और दिमाग की सभी माशपेशियां अलर्ट हो जाती हैं। इस प्रक्रिया से हमारा दिमाग तेज होता है और हमारी याद्दाश्त भी तेज होती है। कई शोध में ये साफ हो चुका है। कान हमारे दिमाग के दोनों हिस्सों में होता है। जब हम इन्हें खींचते हैं, तो ये एक्युप्रेशर के रूप में काम करता है।
इस सजा की हिदायत भी डॉक्टर्स द्वारा टीचर्स को दी जाती है, बच्चे के दिमाग को तुरंत एक्टिव करना है तो उससे कान पकड़कर उठक-बैठक करने को कहा जाए... इसे उसका दिमाग खुलेगा और काम भी करेगा।
वहीं बार-बार उठने और बैठने एक तरह की एक्सरसाइज है, जिसे स्काव्ट्स कहा जाता है। इसके अपने अलग कई फायदे होते हैं। इस शरीर का फैट बर्न होता है, मांसपेशियों का विकास होता है व हड्डियां मजबूत होती हैं।
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