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अगर टीवी शोज या फिर फिल्मों को छोड़ दें.... तो क्या आपने रियल लाइफ में कभी लड़कों को साड़ी पहने देखा है? ज्यादातर लोगों का जवाब होगा न, अगर देखा भी होगा तो घर या होस्टल में जब दोस्तों का ग्रुप मस्ती-मजाक करने के लिए लड़कियों का गेटअप धारण कर लेते हैं। अन्यथा रियल लाइफ में खासकर किसी बड़े फंक्शन में तो आपने कभी लड़कों को साड़ी पहने नहीं देखा होगा और देखेंगे भी क्यों... हमारे समाज में कपड़ों से इंसान के जेंडर के साथ-साथ उसके धर्म और उसके विचार की भी पहचान कर ली जाती है।
जहां कपड़ों में पेंट-शर्ट केवल लड़कों के लिए तो वहीं, सलवार-सूट व साड़ी केवल लड़कियों के लिए ही निर्धारित किये गये हैं। हालांकि, लैंगिक समानता का परचम फैलाते हुए लड़कियां तो पैंट-शर्ट में आ चुकी हैं, लेकिन लड़के सलवार सूट व साड़ी पहनना तो दूर की बात ऐसा ख्याल भी अपने दिमाग में नहीं लाते। अगर आपको ऐसा लग रहा है, तो आप गलत है... क्योंकि आज हम ऐसे ही तीन छात्रों के बारे में आपको बताएंगे जिन्होंने न केवल ऐसा सोचा बल्कि ऐसा करके भी दिखाया।
जी हां, जेंडर इक्वेलिटी को लेकर पुणे के तीन लड़कों ने पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश की है।
पिछले दिनों पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज का Annual फंक्शन था। इस फंक्शन में जहां लड़के एक से बड़कर एक पैंट-सूट-ब्लेजर पहने दिखे, उन्हीं के बीच आकाश, सुमित और रूशिकेष इस एनुअल फंक्शन में ट्रेडिशनल साड़ी पहने दिखाई दिये। पूरे कॉलेज की नजर इन पर थी।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ये कपड़े क्यों पहने हैं, तो उनका जवाब कुछ ये था... “ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि लड़कों को लड़कों वाले कपड़े ही पहनने चाहिए और लड़कियों को साड़ी, सलवार-सूट और स्‍कर्ट। इसलिए हमने तय किया कि हम साड़ी पहनकर जाएंगे।”
उन्होंने ये भी बताया कि उनके इस कदम के बाद उन्होंने कॉलेज के बाकी साथियों की राय की भी परवाह नहीं की।
फिर क्या हर तरफ इनकी ही वाहवाही सुनने को मिली, न केवल कॉलेज के दूसरे छात्र बल्कि कॉलेज के प्रोफेसर्स भी इनके इस कदम की सराहना करने से खुद को नहीं रोक पाए।
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