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आमतौर पर ज्यादातर लोग पर्स अपने जींस या पैंट के पीछे वाले पॉकेट में रखते हैं। पर अगर स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो ऐसा करना उचित नहीं है। आप सोच रहे होंगे कि यह क्या लिखा हुआ है।पर जरा ठहरिए, इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपके मन में उठने वाले सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में न्यूरो ट्रामा कार्यशाला में देश विदेश के 360 न्यूरो विशेषज्ञों ने भाग लिया।इसमें राम मनोहर लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टर फरहान ने यह जानकारी दी कि जिस ओर पर्स रहता है उस पैर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और पढ़ते कारण लोग थोड़ा टेढ़ा होकर भी बैठते हैं जिसका नकारात्मक प्रभाव रीढ़ की हड्डियों पर पड़ता है जिससे ये टेढ़ी हो जाती है।
लोहिया संस्थान के हेड डॉक्टर दीपक सिंह ने बताया कि रीढ़ की हड्डी काफी नाजुक होती है जो हल्के-फुल्के चोट लगने से भी टूट सकती है जिसे जोड़ना काफी कठिन होता है। इसी परेशानी से छुटकारा पाने के लिए इन्होंने दी प्लेट नामक एक डिज़ाइन तैयार किया है, जिससे की रीढ़ की हड्डियों को आसानी से जोड़ा जा सकता है और फिर कभी भी इसके अलग होने का खतरा भी नहीं होगा।
साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ सालों में इन्होंने 22 मरीजों की सर्जरी की है और अब तक वह सभी कुशल से हैं। वे अपने इस खोज को सरकार से मान्यता दिलाना चाहते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस खोज से फायदा पहुंच सके।
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