Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही खेलना आपका फंडामेंटल राइट होगा। सुप्रीम कॉर्ट ने इसका संज्ञान भी ले लिया है। स्कूल में खेल से अब आपको कोई नही रोक सकेगा, अक्सर स्कूल में बच्चो को सोर्ट्स के नाम पर काफी लिमिटेड सुविधाओं को ही दिया जाता है। जिसे सारे बच्चे नही ले पाते या वो लेते है जिनमे उस वक्त ज़्यादा दिलचस्पी होती है।
अब ताज़े मामले से खेल को मौलिक अधिकार में जोड़ने की उम्मीदें बढ़ गई है। दरअसल खेल को शिक्षा के मौलिक अधिकार का हिस्सा बनाए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह नोटिस कानून के एक छात्र की याचिका पर जारी किया है। याचिका में खेलों को स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाए जाने की मांग की गई है।
जस्टिस एसए बोबडे व जस्टिस न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ दवे व राजीव दुबे की दलीलें सुनने के बाद केंद्र व राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। इससे पहले याचिकाकर्ता छात्र कनिष्क पाण्डेय की ओर से बहस करते हुए वकीलों ने कहा कि अनुच्छेद 21ए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की बात करता है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि फिजिकल एजुकेशन में खेल को कैसे शामिल माना जाएगा?
वकील ने कहा कि खेल के बगैर फिजिकल एजुकेशन का कोई मतलब ही नहीं है। फिजिकल एजुकेशन में खेल शामिल हैं। याचिका में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक, सेकेंड्री और उच्च स्तर पर ढांचागत संसाधन जुटाने के लिए एक कोष बनाने की मांग भी की गई है।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.